शिवपुरी। महिला एवं बाल विकास विभाग, शिवपुरी में शासन, प्रभारी मंत्री और जिला कार्यक्रम अधिकारी के आदेशों की सरेआम अनदेखी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरत की बात यह है कि सात माह बीत जाने के बावजूद जिला कार्यक्रम अधिकारी अपने ही जारी किए गए आदेशों को लागू कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार 10 जून 2025 को मध्यप्रदेश शासन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी के आदेश से जिले के भीतर ही 8 पर्यवेक्षकों का स्थानांतरण किया गया था, लेकिन आज तक इन आदेशों पर अमल नहीं हुआ। संबंधित सीडीपीओ ने आदेशों को ताक पर रख दिया और विभागीय अफसर मूकदर्शक बने रहे।
सूत्रों का दावा है कि जिन पर्यवेक्षकों का तबादला किया गया, उनका राजनीतिक रसूख इतना मजबूत है कि न शासन के आदेशों की अहमियत रही और न ही विभागीय अनुशासन की। दबी जुबान में विभागीय कर्मचारी यह तक कह रहे हैं कि “यहां आदेश नहीं, सिफारिश चलती है।”
कागजों में ट्रांसफर, जमीन पर जीरो एक्शन
आदेश जारी कर देने के बाद भी सात माह तक कोई कार्रवाई न होना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आदेश गलत थे तो निरस्त क्यों नहीं किए गए और यदि सही थे तो आज तक लागू क्यों नहीं हुए—इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
मेडिकल बहाना या जिम्मेदारी से बचाव?
जब मामला उजागर हुआ तो जिला कार्यक्रम अधिकारी धीरेन्द्र सिंह जादौन ने एक पर्यवेक्षक के मेडिकल इश्यू का हवाला देते हुए कहा कि “मामले को दिखवा लेते हैं, कार्रवाई की जाएगी।”
लेकिन सवाल यह है कि एक पर्यवेक्षक के मेडिकल इश्यू के कारण आठ तबादले कैसे अटक गए?
यह मामला न केवल प्रशासनिक लचरता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि महिला एवं बाल विकास विभाग में शासन के आदेशों की कोई हैसियत नहीं बची है। अब देखना यह है कि यह मामला फाइलों में ही दबा रहता है या जिम्मेदार अफसरों पर कभी कार्रवाई भी होगी।
सात माह से फाइलों में कैद आदेश, महिला बाल विकास विभाग में शासन की खुली अवहेलना
Reviewed by Bhaiya quazi
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10:53
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